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Showing posts from December, 2016

देश के लोगो ने देशभक्ति का परिचय दिया- मोदी

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नव वर्ष की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अब सरकार की कोशिश ग्रामीण इलाकों में ज्यादा से ज्यादा मकान बनाने की होगी. मोदी ने बेघरों को घर का सपना पूरा करने के लिए देश में होम लोन पर बड़ी छूट का ऐलान किया है.घर बनाने के लिए 9 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 4 प्रतिशत की छूट और 12 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. उन्होंने कहा कि  देश में सिर्फ 24 लाख लोग ये स्‍वीकारते हैं कि उनकी आय सालाना दस लाख से ज्‍यादा है. क्‍या ये बात आपके गले उतरती है. मोदी ने आगे कहा कि पहले ईमानदार लोग घुटन महसूस करते थे. देश एतिहासिक शुद्धि गवाह बना है. उन्होंने कहा देश के लोगो ने देशभक्ति का परिचय दिया.गांवों में बैंकिग समान्य करने के निर्देश दिए गए है ,गरीब किसानों का कष्ट कम होगा. अपने संबोधन में मोदी ने यह बात मानी की कहीं कहीं सरकारी कर्मचारियों ने भी गलत काम किया,कुछ लोगों के गंभीर अपराध सामने आए हालाँकि उन्होंने कहा कि भ्रष्ट बैंक कर्मचारियों को बक्शा नही जाऐगा.  मोदी ने राजनितिक पार्टियों से भी सभी चुनावों को एक साथ कराने के लिए विचार करने…

अनिल बैजल ने दिल्ली के उपराज्यपाल की शपथ ली

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दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग के अपने पद से इस्तीफ़ा देने के बाद अब अनिल बैजल को दिल्ली का नया उप राज्यपाल नियुक्त किया गया है. बैजल अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार दौरान साल 2004 में होम सेक्रटरी बनाए गए लेकिन उनको यह पद जल्द ही छोड़ना पड़ा क्योकि मई 2004 में कांग्रेस सरकार ने बजल से पदभार ले लिया था।
दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच कई बार मतभेद की खबरे आती रही हैं. ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प रहेगा की नव निर्वाचित उप राज्यपाल बैजल से दिल्ली के मख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कैसे तालमेल बनायेंगे.
बैजल की उम्र 70 वर्ष है. अब उम्मीद की जा रही है की बैजल गंभीरता से अपने पद पर कार्य करेंगे और सही फैसले लेंगे. नए एलजी अनिल बैजल ने साल 1969 में यूटी कैडर से आईएएस के रूप में सेवाए देना शुरू किया था।
सेवा निवृत्त होने के बाद अनिल बैजल विवेकानंद इंटरनैशल फाउंडेशन के थिंक टैंक मेम्बर रह चुके हैं. जब अनिल बैजल का नाम राष्ट्रपति के पास पहुचा था तभी से उनको एलजी के पद के लिए सबसे काबिल इन्सान समझा जा रहा था. अब सभी की नज़र नये एलजी के ऊपर है।
पूर्व केंद…

मुलायम सिंह और अखिलेश लड़ाई मात्र मीडिया से भाजपा को दूर रखना

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सलाहकार का मेल लीक, अखिलेश की छवि के लिए झगड़ा प्लांट — पिछले कुछ दिन से समाजवादी पार्टी में चल रहे पारिवारिक घमासान के बीच एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसे जानकर लोग हैरान रह जाएंगे। समाजवादी पार्टी की आंतरिक रणनीति से जुड़े एक ई-मेल के लीक होने से अब कहा जा रहा है कि सपा में ये झगड़ा केवल अखिलेश यादव की इमेज को चमकाने का शिगूफा है। ये लीक मेल जुलाई महीने का है। खबर अनुसार अखिलेश के अमेरिकी सलाहकार स्टीव जार्डिंग के एक मेल के लीक होने से ये खुलासा हुआ है। जार्डिंग द्वारा भेजे गये ईमेल में लिखा है कि यूपी में अखिलेश यादव को विकास का आइकॉन बनाने के लिए पार्टी में अदरूनी लड़ाई दिखाना जरूरी है। उन्होंने मेल में लिखा है कि अखिलेश की छवि बेहतर उभर कर आएगी और मजबूत सीएम के तौर पर जाने जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि समाजवादी पार्टी और सीएम अखिलेश सरकार की सकारात्मक छवि दिखाने के लिए अमेरिकन पीआर एजेंसी भी हायर करने व और भारत की भी कुछ पीआर एजेंसी ब्रांडिंग और इमेज बिल्डिंग का काम कर नेताओं की नकारात्मक छवि को सकारात्मक बनाने का काम करती हैं। जनता या टार्गेट ऑडियंस के मन में किसी भ…

अजीब खानदान है, बाप बेटे का नहीं, बेटा-बाप का नहीं: असदुद्दीन ओवैसी

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एआईएमआईएम के मुखिया और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी में हो रहे विवाद पर कहा है कि यहां पर जो हो रहा है, वह ऐतिहासिक है. एक बाप ने अपने बेटे को पार्टी से निकाल दिया. ओवैसी ने कहा कि अजीब परिवार है. अजीब पार्टी है, अजीब खानदान है. जहां बाप बेटे का नहीं हुआ, बेटा-बाप का नहीं हुआ. चाचा भतीजे का नहीं हुआ और भतीजा चाचा का नहीं हुआ. बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद समाजवादी पार्टी बनी- लखनऊ में पार्टी की जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा किबाप-बेटे की ये लड़ाई पचीस सीटों के लिए नहीं है. हो सकता है कि इसका कारण दौलत हो या फिर कोई और कारण हो. उन्होंने आगे कहा,’बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद समाजवादी पार्टी बनी थी. मुसलमानों ने मुलायम सिंह को नेता बनाया, लेकिन उन्होंने मुसलमानों को क्या दिया?’ ओवैसी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और बीजेपी में कोई फर्क नहीं है. यूपी में सारी पार्टियां मुसलमानों को वोटबैंक ही समझा- कांग्रेस हो या फिर बीएसपी सभी ने मुसलमानों को वोटबैंक ही समझा. विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में मुसलमानों को आबादी के हिसाब से 18 फीसदी आरक्षण का वादा…

आज की कांग्रेस स्वदेशी है या विदेशी ?

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ए ओ ह्यूम  और सोनिया गांधी दोनों विदेशिओं का कांग्रेस के इतिहास में बहुत महत्व है। ए ओ ह्यूम अगर कांग्रेस से संस्थापक हैं तो सोनिया गांधी वर्तमान कांग्रेस के अध्यक्षा। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब कांग्रेस विदेशी सोनिया गांधी को स्वीकार कर सकते हैं तो कांग्रेस संस्थापक को स्वीकार करने से गुरेज क्यों ? दुनिया में शायद कांग्रेस ही सबसे पुरानी पार्टी है। इतनी लम्बी ज़िन्दगी शायद किसी भी राजनैतिक पार्टी नहीं। 28 दिसंबर 1885 को ह्यूम द्वारा स्थापित कांग्रेस और 28 दिसंबर 2015 तक परिस्थितियां में समानता ठूंठना बेशक असंभव हो।  लेकिन कांग्रेस में कुछ बातें सहज ही देखी जा सकती हैं। लगभग 130 वर्ष पूर्व इस पार्टी के केंद्र में थियोसॉफिकल सोसाइटी से जुड़े एक अनोखे यूरोपीये व्यक्तित्व ए ओ ह्यूम  थे, जबकि आज यूरोपिये मूल की अन्य व्यक्तित्व सोनिया गांधी है। ए ओ ह्यूम ने बदला इटावा ए ओ ह्यूम, एक ऐसा नाम है जिसके बारे मई कहा जाता है कि उन्होंने ग़ुलामी के दौर में एक ऐसा नाम दिया जो आज देश की तस्वीर और तकदीर बन गया है। 4 फ़रवरी 1856 को कलेक्टर बन कर आये 4 फ़रवरी 1856 को इटावा के कलेक्टर के रूप में…

मेरे पास निराशावादियों के लिए कोई दवाई नहीं है, आशावादियों के लिए ‘Bhim’ है -- मोदी

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मोदी ने दिसम्बर 30 को  डिजिधन मेले के समापन अवसर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए 'Bheem' एप लांच किया। इस अवसर पर बोलते हुए कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला, उन्होंने बिना नाम लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि आज बड़े बड़े पदों पर रहे लोग भी कहते हैं कि ये कैसे हो सकता है, देश में इतने आदमी गरीब हैं, इतने आदमी अनपढ़ हैं, मोबाइल फोन कहाँ है जो मोदी कैशलेस की बात कर रहे हैं।  मोदी ने कहा कि निराशा में पले बढे लोगों के लिए मेरे पास कोई औषधि नहीं है लेकिन आशावादी लोगों के लिए मेरे पास हजारों औषधि हैं। उन्होंने कहा कि Bhim एप आशावादी लोगों के लिए ऐसी औषधि है जो उन्हें बहुत लाभ देगी और सिक्कों और नोटों में होने वाला व्यापार डिजिटल पेमेंट में बदल जाएगा।  मोदी ने कहा कि आज कोई धोबी और छोटी सी हजाम की दुकान चालाने वला सोच भी नहीं सकता कि बैंक उन्हें लोन भी दे सकता है। कोई अखबार बेचने वाले भी नहीं सोच सकता कि बैंक उसे पैसे देगा, इसका कारण यह है कि हमने व्यवस्था ही ऐसी बना रखी है।  मोदी ने कहा कि हमारा एप भीम सामान्य चीज नहीं है, आप के परिवार के लिए…

इस तरह पकडे जा रहे हैं कालेधन कुबेर

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नोटबंदी होने के बाद से सबसे ज्याद अगर डरे हुए है तो वो है कालेधन रखने वाले ! क्यूंकि इनकम टैक्स के साथ-साथ ख़ुफ़िया विभाग भी दिन रात कालेधन वालो को पकड़ रहा है ! और उनका सारा पैसा जब्त कर रहा है ! इसमें सबसे ज्यादा नए नोट ही पकडे जा रहे है !सूत्रों के अनुसार ये सारी कार्यवाही पीएमओ के द्वारा की जा रही है ! और पीएमओ की सूचना पर ही ख़ुफ़िया विभाग छापा मार रही है ! और छिपाये गए कालेधन को पकड़ कर जब्त कर रही है !
फोन से जानकारी-जब से प्रधानमंत्री मोदी जी ने नोटबंदी की है उसी दिन से पीएमओ के पास लागातार कम से कम 15 से 20 टेलीफोन कॉल्स आ रही है ! अभी तक पीएमओ को लगभग 600 से ज्यादा कॉल आ चुकी है ! इन कॉल के द्वारा कालाधन रखने वालो के नाम पते बताये जा रहे है ! और उन्ही के आधार पर पीएमओ स्टाफ अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी को आगाह कर रही है ! और ख़ुफ़िया एजेंसी कालेधन रखने वालो को पकड़ रही है !
मोदी जी पर जनता का भरोसा-जिस प्रकार से कालाधन पकड़ा जा रहा है ! उससे पता चलता है कि भारत की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर अत्यधिक विश्वास कर रही है ! इसलिए फ़ोन के द्वारा कालेधन रखने वालो के नाम और पता पीएमओ को बता रही ह…

India after British rule

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India after the British rule We may have physically come out of the British bondage, but unfortunately we still mentally serve the west. It is so, essentially, because of the ideas and structures we have retained even after the departure of the British.
@ShrinidhiRaya91
Identity (Distortion & Appropriation) | 27-12-2016
IN the preceding articles, we have briefly explored various financial and psychological atrocities committed by the British on the Indian people. We saw how the British through their hostile financial policies like taxation, impoverished the Indian people. On the other hand, they tried their best to uproot the Indianness in Indians by denying them their civilization, history and identity. The Indian independence struggle was a movement to break free from the subjugations of all sorts. It is rather ironic that the independence we had lost long ago due to our disunity had to be taken back by shedding blood of thousands of martyrs and the sacrifices of mil…