तिरंगे को सलाम न करने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने दिखाया रंग

 हामिद अंसारी की यह फोटो (जिसमें वो तिरंगे को सलामी नही दे रहे है)
खूब वायरल हुई थी।  इसी बात से हामिद अंसारी की कट्टरता को समझा जा
 सकता है कि एक देश एक बड़े और सम्माननीय पद पर बैठने के
 बाद भी उन्होंने तिरंगे को सलामी देना ठीक नही समझा। 
निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 'स्वीकार्यता के माहौल' को खतरे में बताते हुए कहा है कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है। उपराष्ट्रपति के तौर पर 80 साल के अंसारी का दूसरा कार्यकाल आज(अगस्त 10) को पूरा हो रहा है। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब असहनशीलता और कथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी की घटनाएं सामने आई हैं।
वैसे हामिद अंसारी कई बार पहले भी विवादों में आ चुके हैं, मुस्लिम होने की वजह से उन्होंने कभी भी तिरंगे को सलाम नहीं किया जिसके वजह से उनके कई बार खिंचाई हो चुकी है। 
हामिद अंसारी ने भले ही कांग्रेस को मुद्दा देकर कुर्सी छोड़ी है लेकिन उन्होंने अपने पद की गरिमा का ख्याल नहीं किया।  इतने वर्षों तक वे खुद उप-राष्ट्रपति रहे हैं, उनके ही वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राष्ट्रपति रहे हैं, इन लोगों ने इतने बड़े संवैधानिक पदों पर बैठकर आखिर किया क्या है? मुस्लिमों को इनके रहते हुए क्यों घबड़ाहट महसूस हो रही है, अगर आपको ऐसा लगता था तो आपने कुर्सी क्यों नहीं छोड़ी. कुर्सी छोड़ते ही ऐसे बयान क्यों याद आते है। 
अंसारी ने कहा कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों के सामने उठाया है। उन्होंने इसे 'परेशान करने वाला विचार' करार दिया कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। राज्यसभा टीवी पर जाने माने पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में जब अंसारी से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है, इस पर उपराष्ट्रपति ने 'हां' कहकर जवाब दिया। सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, 'यूं तो हमेशा एक स्पष्टीकरण होता है और एक तर्क होता है। अब यह तय करने का मामला है कि आप स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि नहीं और आप तर्क स्वीकार करते हैं कि नहीं।'
इस इंटरव्यू में अंसारी ने भीड़ की ओर से लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, 'घर वापसी' और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह 'भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना, सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है और इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है।' यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक तरह की शंका है और जिस तरह के बयान उन लोगों के खिलाफ दिए जा रहे हैं, उससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इस पर अंसारी ने कहा, 'हां, यह आकलन सही है, जो मैं देश के अलग-अलग हलकों से सुनता हूं। मैंने बेंगलुरु में यही बात सुनी। मैंने देश के अन्य हिस्सों में भी यह बात सुनी। मैं इस बारे में उत्तर भारत में ज्यादा सुनता हूं। बेचैनी का अहसास है और असुरक्षा की भावना घर कर रही है।'
यह पूछे जाने पर कि क्या मुस्लिमों को ऐसा लगने लगा है कि वे 'अवांछित' हैं, इस पर अंसारी ने कहा, 'मैं इतनी दूर नहीं जाऊंगा, असुरक्षा की भावना है।' 'तीन तलाक ' के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह एक 'सामाजिक विचलन' है, कोई धार्मिक जरूरत नहीं। धार्मिक जरूरत बिल्कुल स्पष्ट है, इस बारे में कोई दो राय नहीं है लेकिन पितृसत्ता, सामाजिक रीति-रिवाज इसमें घुसकर हालात को ऐसा बना चुके हैं जो अत्यंत अवांछित है।' उन्होंने कहा कि अदालतों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे। कश्मीर मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह राजनीतिक समस्या है और इसका राजनीतिक समाधान ही होना चाहिए।
मोदी भी जवाब देने से नहीं चूके 
pm-narendra-modi-strong-reply-to-hamid-ansari-on-muslim-issueप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपने ही ढंग से जवाब दिया. उन्होने हँसते हँसते बड़ी चतुराई से हामिद अंसारी को जवाब दे दिया, हामिद अंसारी भी उनके जवाब को समझ गए और सर झुकाकर हंसने लगे.
उन्होंने कहा कि आपके जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा वेस्ट एशिया से जुड़ा रहा है. उसी दायरे में जिन्दगी के बहुत सारे वर्ष आपके गए, उसी माहौल में, उसी सोच में, उसी डिबेट में, आप ऐसे ही लोगों के बीच में रहे. वहां से रिटायर होने के बाद भी आपका ज्यादातर काम उसी तरह का रहा, आप हमेशा माइनॉरिटी कमीशन में रहे, अलीगढ यूनिवर्सिटी में काम करते रहे इसलिए आपका दायरा वही रहा.
मोदी ने कहा कि पिछले 10 तक आपके ऊपर एक अलग जिम्मा रहा और पूरी तरह से एक एक पल संविधान के ही दायरे में आप बंधे रहे, आपने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाने का प्रयास भी किया, हो सकता है आपके भीतर कुछ छटपटाहट रही हो लेकिन आज के बाद आप मुक्त हो जाएंगे तो आपको बोलने से कोई नहीं रोक पाएगा।  अब आपको अपनी मुक्ति का आनंद भी रहेगा और आप अपनी मूलभूत सोच के मुताबिक़ काम कर पाएँगे। 
देश के निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को भारतीय जनता पार्टी के मुस्लिम नेता शाहनवाज हुसैन ने जवाब देते हुए कहा है कि इस दुनिया में मुसलमानों के रहने के लिए भारत से बेहतर कोई मुल्क नहीं है और ना ही एक हिन्दू से अच्छा दोस्त उन्हें मिल सकता है। शाहनवाज हुसैन ने ये टिप्पणी निवर्तमान उपराष्ट्रपति के उस बयान में की है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस वक्त देश के मुसलमानों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है।हामिद अंसारी ने राज्यसभा में भी अपने आखिरी संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी ने हामिद अंसारी के इस बयान को खारिज कर दिया है। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि हिन्दुस्तान मुसलमानों के लिए दुनिया का सबसे बढ़िया देश है, जहां वे अपनी पूरी धार्मिक आजादी के साथ रहते आए हैं।
बीजेपी नेता प्रीति गांधी ने भी हामिद अंसारी के इस बयान पर सवाल उठाया है। प्रीति गांधी ने कहा है कि जिस हिन्दू बहुल देश में आप सत्ता के सर्वोच्च बिन्दू तक पहुंचे वहां आपको असुरक्षा की भावना महसूस हो रही है, आखिर आपका एजेंडा क्या है? प्रीति गांधी ने ट्वीट किया, बैठाया, और अब भी आप असहज महसूस करते है? एजेंडा क्या है?’

For 10yrs my Hindu majority nation accepted you with open arms, placed you at the pinnacle of power & you still feel uneasy? Agenda kya hai? https://twitter.com/indianexpress/status/895326627135053824 

‘ 10 सालों तक मेरे हिन्दू बहुल देश ने बाहें फैलाकर आपको स्वीकार किया, आपको सत्ता के शिखर पर बैठाया, और अब भी आप असहज महसूस करते है? एजेंडा क्या है?’
कुछ लोग जो खुद को मुसलमानों का मसीहा समझते है या कुछ लोग उन्हें अपना मसीहा बना लिए है ऐसे लोग हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। तीन तलाक के मुद्दे पर जहां महिलायें इस तरह पीड़ित है कि वो चाहती है कि कोर्ट उन्हें इन्साफ दे। ऐसे मसले पर हामिद अंसारी कह रहे है कि इस मामले में कोर्ट दखल न दें। सच बात तो यह है कि आज कल हर मुस्लिम नेता यह कहकर लोगो से हमदर्दी पाना चाहता है कि उसके उपर अत्याचार हो रहा है। उनको डराया जा रहा है। 
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उत्तर प्रदेश के जानेमाने डॉन मुख्तार अंसारी के चाचा हामिद अंसारी है। मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली नेता भी है जो अधिकतर जेल में ही रहते है।देश में हुए कई आतंकवादी घटनाओं में लिप्त अधिकतर मुसलमानों के होने के बावजूद किसी नेता ने यह नही कहा कि देश का हिन्दू खतरें में है। देश में अन्य जगहों पर हिन्दुओ पर हुए हमलें में किसी ने नही कहा कि हन्दू खतरें में है! दरअसल खतरें में कोई नही है खतरे में है नेतागिरी। 
अंसारी साहब जवाब दो : 
खतरे में कौन? हिन्दू या मुसलमान? 
अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा कि देश के मुसलमानों में बेचैनी और असुरक्षा का माहौल है। इसी मुद्दे पर जी न्यूज़ ने एक कार्यक्रम रखा जिसका शीर्षक था- मुस्लिमों की ‘बेचैनी’ समझने में अंसारी ने इतनी देर क्यों की? इस शो के एंकर रोहित सरदाना ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट पर दी।
मुस्लिमों की 'बेचैनी' समझने में अंसारी ने इतनी देर क्यों की?
ताल ठोक के, 5PM, @ZeeNews 
रोहित सरदाना के इसी ट्वीट पर बिलाल नंबरदार ने रिप्लाई करते हुए लिखा- 2019 में तुम्हारी नाल ठोकी जाएगी, तब तक जहर फैलाते रहो।
रोहित ने इसी रिप्लाई को रिट्वीट करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान की चुटकी ली।
ये लो. अंसारी साहब को दिखाओ रे कोई! यहाँ तारीख़ों के साथ धमकियाँ दे रहे लोग और अंसारी साहब कह रहे मुसलमान डरा हुआ है!! https://twitter.com/bilal_lambardar/status/895599321764184067 
रोहित सरदाना के इसी ट्वीट पर बिलाल नंबरदार ने रिप्लाई करते हुए लिखा- 2019 में तुम्हारी नाल ठोकी जाएगी, तब तक जहर फैलाते रहो।
रोहित ने इसी रिप्लाई को रिट्वीट करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान की चुटकी ली।
ये लो. अंसारी साहब को दिखाओ रे कोई! यहाँ तारीख़ों के साथ धमकियाँ दे रहे लोग और अंसारी साहब कह रहे मुसलमान डरा हुआ है!! https://twitter.com/bilal_lambardar/status/895599321764184067 

आपको बता दें कि हामिद अंसारी के बयान पर राजनीतिक गलियारे में घमासान मचा हुआ है। सोशल मीडिया में भी हामिद अंसारी के बयान को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कुछ यूजर्स का कहना है कि 10 साल जब उपराष्ट्रपति बने रहे तब हामिद अंसारी को मुसलमान सुरक्षित नजर आता था और जब पद से हट गए हैं तो मुसलमान असुरक्षित नजर आने लगा है।
हामिद साहब सेवानिर्वित होने उपरान्त दो वर्ष से अधिक एक हिन्दी पाक्षिक का सम्पादन करते, अप्रैल 16-30, 2014 के अंक पृष्ठ 3 पर एक रपट शीर्षक "कांग्रेस शासन में 22000 दंगों में 7 लाख मुसलमानों की जानें गयीं-- शाहबुद्दीन गौरी" प्रकाशित की थी। इतना ही नहीं, बेशक़ कुछ लोग मेरी रपट, स्तम्भ एवं लेख पढ़ फिरकापरस्त/ साम्प्रदायिक तत्व से नवाज़ते रहे, लेशमात्र भी चिन्ता नहीं की, क्योकि ऐसा करने वाले वास्तविकता से अज्ञान, बेवकूफ सिरफिरे लोगों की श्रेणी से आते है। 
इसी पाक्षिक में मैंने यह भी प्रकाशित किया था कि इतने वर्ष बीत जाने उपरान्त भी मलियाना के मुसलमानों को क्यों नहीं मिल रहा इंसाफ? मलियाना काण्ड में मुसलमानों को किस तरह गोली मार-मार कर नदी में फेंका जा रहा था, उस समय उत्तर प्रदेश में केन्द्र में कांग्रेस ही की सरकारें थीं।जब कांग्रेस के ही शासन में मुसलमानों का नरसंहार किया जा रहा हो, फिर वही कांग्रेस मुस्लिम हितैषी कैसे हो सकती है? फिर 2014 का चुनाव घोषित होने से पूर्व मुस्लिम हित में अनेको योजनाओं की घोषणाएँ हुई, सभी योजनाओं के लिए धन भी आबंटित किया गया था, बस सलमान खुर्शीद को छोड़ किसी ने भी उस धन का प्रयोग किये बिना वापस कर दिया। जहाँ तक सलमान द्वारा धन प्रयोग की बात है, केवल कुछ धन का प्रयोग किया वह भी अपनी पत्नी के NGO में, जहाँ आधे से अधिक धन घोटाले में चला गया। वैसे हमीद साहब एक काम करिये, मुसलमानो द्वारा जितने भी NGOs चलाए जा रहे हैं, उनकी आप स्वयं जाँच करिये और फिर बताइये मुसलमान के नाम पर लूट कौन मचा रहा है? फिर भी मुसलमान असुरक्षित कैसे हो सकता है, यह तो साम्प्रदायिकता का स्पष्ट प्रमाण है।     

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